सप्तमी तिथि में जन्मा जातक सामान्यत: धनवान, सुंदर, सदाचारी, एवं मान-सम्मान पाने वाला होता है।
Last Updated  12:17 PM [15/01/2016]

16 जनवरी 2016 को शनिवार है। इस दिन शुभ वि.सं.: 2072, संवत्सर नाम: कीलक, अयन: उत्तर, शाके: 1937, हिजरी: 1437, मु.मास: रवि-उलसानी-5, ऋतु: शिशिर, मास: पौष, पक्ष: शुक्ल है। इस दिन शुभ तिथि: सप्तमी भद्रा संज्ञक तिथि सायं 5.56 तक, तदन्तर अष्टमी जया संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। सप्तमी तिथि में यथाआवश्यक समस्त शुभ व मांगलिक कार्य, नाचना-गाना, वस्त्रालंकार, सवारी, वाहन, यात्रा, प्रवेश, विवाह, उपनयन, प्रतिष्ठा तथा अलंकारादिक कार्य शुभ होते हैं।

अष्टमी तिथि में सामान्यत: लेखन, नाचना-गाना, मनोरंजन के कार्य, फिल्म-संगीत, वास्तु, विवाह व वधू प्रवेशादि कार्य शुभ होते हैं। सप्तमी तिथि में जन्मा जातक सामान्यत: धनवान, प्रतिभाशाली, कलाकार, सुंदर, सदाचारी, दृढ़व्रती एवं मान-सम्मान पाने वाला होता है।नक्षत्र: रेवती नक्षत्र अर्द्धरात्रि के बाद 1.13 तक, तदुपरान्त अश्विनी नक्षत्र रहेगा। रेवती नक्षत्र में घर, देव-मन्दिर, अलंकार, विवाह, जनेऊ, जल व स्थल सम्बन्धी कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। अश्विनी नक्षत्र में यात्रा, दवा ग्रहण, विद्यारम्भ, चित्रकारी, कलादि कार्य, सवारी, विवाह व समस्त मांगलिक कार्य करने चाहिए। रेवती व अश्विनी दोनों गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र है। अत: इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण के लिए 27 दिन बाद जब पुन: इन्हीं नक्षत्रों की आवृत्ति हो तब नक्षत्र शांति अर्थात् मूल शांति करा देना जातकों के हित में होगा। रेवती नक्षत्र में जन्मा जातक सामान्यत: निरोगी, साहसी, सर्वप्रिय, धनवान, कामलोलुप, सुंदर, चतुर, सलाहकार, मेधावी, व्यवसायी, विद्वान एवं बुद्धिजीवी व्यक्ति होता है।योग: शिव नामक योग सायं 4.42 तक, तदन्तर सिद्ध नामक योग रहेगा। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग हैं। करण: वणिज नामकरण सायं 5.56 तक, इसके बाद भद्रा अन्तरात्रि 4.57 तक व तदन्तर बवादि करण रहेंगे। चंद्रमा: चन्द्रमा रात्रि 1.13 तक मीन राशि में उसके बाद मेष राशि में रहेगा। ग्रह मार्गी-वक्री: अन्तरात्रि 4.36 पर वक्री बुध पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश करेगा। व्रतोत्सव: शनिवार को गुरु गोविन्द सिंह जयंती तथा पंचक समाप्त रात्रि 1.13 से।शुभ मुहूर्त: उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार शनिवार को विवाह रेवती में (राहुवेध) व अश्विनी में (कात्यायनोक्त) विपणि-व्यापारारारम्भ के अश्विनी में, गृहारम्भ व गृहप्रवेश के, अशुद्ध रेवती में (राहुवेध दोष) यथाआवश्यक शुभ मुहूर्त हैं। वारकृत्य कार्य: शनिवार को सामान्यत: तीक्ष्ण व दारूण संज्ञक कार्य, सभी स्थिर संज्ञक कार्य, अस्त्र-शस्त्र धारण, नवीन गृह प्रवेश, असत्य भाषण, काष्ठ कर्म एवं पशु क्रय-विक्रय आदि कार्य सिद्ध होते हैं। दिशाशूल: शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। अति आवश्यकता में कुछ उड़द के दाने चबाकर शूल दिशा की अनिवार्य यात्रा पर प्रस्थान कर लेना चाहिए। चन्द्र स्थिति के अनुसार उत्तर दिशा की यात्रा शुभप्रद व लाभदायक है।

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